05से10तक चंडिका देवी फर्श प्राण प्रतिष्ठा व देवरा यात्रा का कार्यक्रम:

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05से10तक चंडिका देवी फर्श प्राण प्रतिष्ठा व देवरा यात्रा का कार्यक्रम:
पुष्कर पर्वत न्यूज/राजेन्द्रअसवाल पोखरी(चमोली)









हिन्दू धर्म में शक्ति की देवी एक उग्र और दयालू रूप ,जिनका इतिहास देवी महात्म्य जैसे प्रचीन ग्रंथो और नई लोक कथा में मिलता है, जहां उन्हें राक्षसो का संहार करने वाली और भक्तो का उद्धार करने वाली शक्ति  में वर्णित है।
जनपद चमोली के विकास खंड पोखरी में बारुलि पट्टी सहित 84 गाँवों की अधिष्ठात्री राजराजेश्वरी माँ  पोखरी-चमेठी में स्थित मां चंडिका देवी का फर्श निर्माण,यज्ञ व देवरा  यात्रा की तैयारी जोरो पर चल रही हैं। जिसमें चंडिका देवरा समिति एंव भक्तगणो में भारी उत्साह बना  हुआ है। समिति के पदाधिकारियों  द्वारा बताया गया कि चमेठी चंडिका देवी की बन्याथ ऐज से 149 साल पहले हुई थी, इसबार  मंदिर समिति के पदाधिकारी 05जनवरी को   उखीमठ जायेगें, 06 जनवरी को बह्म गुरू दीपक कुंवर के साथ नव निर्मित फर्श व अन्य सामाग्री सहित नव वर्ष 06 जनवरी को उखीमठ से पोखरी में  रात्रि विश्राम  करेंगे,  07 जनवरी को पोखरी से  सिनाऊं गाँव जायेगें, वहां पर तीन दिन तक फर्श  प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम किया जायेगा। और तीसरे दिन फर्श शायं को चंडिका मंदिर  चमेठी पोखरी में पहुंचेगा, यहां मंदिर में 09 व  व10जनवरी  को  फर्श का शुद्धिकरण  और पूजा-पाठ किया जायेगा। उसके बाद चंडिका  देवरा यात्रा  को लेकर विचार विमर्श व तैयारियों की रूप रेखा बनायी जायेगी।
पौराणिक स्रोत:
यह जानकारी चंडिका देवरा समिति के अध्यक्ष  बीरेंद्र राणा,उपाध्यक्ष महिधर पंत, कोषाध्यक्ष कुंवर सिंह चौधरी,उपाध्यक्ष हनुमंत सिंह असवाल, महामंत्री सतेन्द्र बुटोला ने संयुक्त रूप  से दी गयी।उन्होने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए  चमेठी गांव के  राजराजेश्वरी मां चंडिका देवी के पंत पुजारी भी व्यवस्था पर लगे है, साथ ही भक्तो में अपार श्रद्धा क और उत्साह बना हुआ है।  
पौराणिक स्रोत: देवी महात्म्य 05 वीं 06वीं सदी में उन्हें सर्वोच्च देवी के रूप  में चित्रित किया है, जो चंड-मुंड जैसे राक्षसो को बद्ध करती है और और महिषासुर मर्धनी दुर्गा के रूप में प्रकट होती है। 
भक्ति और पूजा चंडिका देवी शक्ति का वह स्वरूप है,जो बुराई का बुराई का नाश करती है,और धर्म और आस्था की रक्षा करती है। और चंडिका देवी का इतिहास प्राचीनकाल से ही भारतीय संस्कृति व धर्म का अभिन्न  अंग रहा है।

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