पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है, नागनाथ मेले का:

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पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है, नागनाथ  मेले का:
पुष्कर पर्वत न्यूज/राजेन्द्रअसवाल:







जनपद चमोली के  नागनाथ-पोखरी में जन्माष्टमी के पर्व हर वर्ष यहां नागनाथ मंदिर में  लगने वाले मेले का पौराणिक  व ऐतिहासिक महत्व  है। बताते चले कि मेले के आयोजन के लिए कोई कमेटी या  समिति  नही है। श्रीकृष्ण के जन्म के उत्सव को लेकर श्रद्घालु भक्तो में भक्ति भावना जागृत होती है और और इस पर्व पर भगवान नागनाथ के दर्शनो के लिए भारी संख्या में दर्शन के लिए लोग पहुंचते। 


मंदिर में इस पर्व पर नौठा गांव के सती परिवार के पुजारी मौजूद रहते है।नागनाथ मंदिर की पौराणिक, ऐतिहासिक व धार्मिक मान्यताएं है कि श्रृष्टि कर्ता ब्रह्मा के श्राप से कद्रू पुत्र नागो ने यहां नागनाथ मे आकर तीन कल्प तक घोर तपस्या की थी। तप में प्रमुख नागो  में पुष्करनाग,पद्मनाग, वासुकि नाग, तक्षक नाग के अलावा नागो के अन्य वंशजो ने यहां तप किया।भगवान शंकर ने प्रशन्न होकर उन्हे दर्शन  दिए,और आशीर्वाद के रूप में इन  नागो को अपना आभूषण बनाया। और यह वरदान दिया कि जबतक यह श्रृष्टि रहेगी तबतक यह क्षेत्र  तुम्हारे नाम से प्रसिद्ध रहेगा।


इसलिए इस स्नाथान का नाम नागनाथ पड़ा,पुष्कर नागनाथ की राजधानी होने पर पुष्कर पर्वत नाम प्रसिद्ध हुआ।शिव के आशीर्वाद से यह क्षेत्र गोपनीय कहलाता है। इस क्षेत्र के अंतर्गत यक्ष,किन्नर, देवी,देवता,गंधर्व, आदि विचरण करते है। पुण्य आत्मोत्थान को ही इनके दर्शन होते है। इस ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के अनुसार हर वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर  धार्मिक मेला लगता है। यह धार्मिक मेला बिना किसी समितियों के आयोजन के मेला लगता है, और संपन्न होता है। 


पौराणिक, ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व को देखते हुए यहां तीर्थाटन के साथ-साथ पर्यटन की भी अपार संभावनाएं है।  ग्राम देवर की मीना रावत भंडारी ने बताया कि ग्राम वासी जन्माष्टमी मेले के पर्व पर हनुमान व शनिदेव की मूर्ति  प्राण प्रतिष्ठा के साथ मंदिर परिसर में स्थापित करेंगे। 


*नागनाथ मंदिर का निर्माण* 

लगभग 1918 ई0 से 1921 ई0 के बीच हुआ है। इस मंदिर से कुछ दूरी ऊपर की ओर काबेश्वर महादेव का मंदिर है।ठीक इसी के ऊपर आधा किमी0 की दूरी पर गढ़ी में राजराजेश्वरी मां का मंदिर है। 

*मंदिर का महत्व* 

इस मंदिर  में जो भी भक्त आस्था व विश्वास से आता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती है।

*मंदिर तक कैसे पहुंचते है*

पोखरी-कर्णप्रयाग सड़क पर इंटर कालेज वाली सड़क से वन विभाग रेंज तक जाने वाली सड़क से मंदिर तक पहुंचते है। इसी प्रकार कर्णप्रयाग से पोखरी सड़क से पहुंचते है।

*नामधारा का महत्व*

नागनाथ मंदिर के बाकी ओर नागधारा है, इसके जल के सेवन से मनुष्य के रोग पाप नष्ट होते और जल ग्रहण करने पर दूध के बराबर प्रोटीन मिलता है।

* *नागनाथ ऐतिहासिक शिक्षण स्थली*

* ब्रिटिश शासन काल में 1901 मिडिल स्कूल खोला गया था, जो आज इंटरमीडिएट कालेज के अलावा पीजी कालेज तक संचालित है। नागनाथ विद्यालय में पड़े छात्र देश ही नही विदेशो में भी इस क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे है।

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