कैलब के ग्रामीणआठ साल से तरस रहे है सड़क लिए :

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 कैलब के ग्रामीणआठ साल से तरस रहे है सड़क  लिए :
पुष्कर पर्वत न्यूज/राजेन्द्रअसवाल:






चमोली:

    सरकार की पलायन प्रभावित गांवो की तस्वीर बदलने की कवायद चलाई  जा रही है। लेकिन कैलब गांव की तस्वीर कब बदलेगी,  ग्रामीण   आठ साल से सड़क के लिए तरस रहे है।  

जनपद चमोली के विकास खंड पोखरी के ग्राम कैलब की लगभग पैंसठ परिवारो में से 63परिवार रोजगार, शिक्षा व यातायात के अभाव में  पलायन  को मजबूर हो गये थे,  उत्तराखंड सरकार  पलायन  रोकने के लिए गंभीरता से कदम उठा रही है, और विभिन्न विभागो की योजनाओ को एकीकृत ढंग से संचालित कर गांवो को संतृप्त करने  को लेकर  विभिन्न स्वरोजगारपरक  योजनाओ को धरातल पर उतारने  की कवायद की तैयारी कर रही है। सरकार की इस पहल को देखते हुए  कैलब गांव के लोग रिवर्स पलायन कर गांव में नई  जिंदगी की शुरुआत करने को  है।कई लोगो ने पुराने खंडर पड़े पुस्तैनी मकानो का नव निर्माण भी कर दिया है, और रहने भी लगे है। लेकिन उनकी मूलभूत समस्या आज भी यातायात की है। गांव को जोड़ने के लिए आठ साल पूर्व से 05 किमी0सडक स्वीकृत है। जिसके निर्माण के लिए ग्रामीण प्रयासरत है। लेकिन विभागीय हीला-हवाली के चलते अभी तक वन भूमि हस्तांतरण की कार्यवाई को अमलीजामा नही पहनाया गया है।जिस वजह सड़क का निर्माण नही हो पाया है। बलराम शास्त्री,सत्येन्द्र प्रसाद, उमेश चन्द्र, दिनेश चन्द्र ने कहा कि रिवर्स पलायन कर आये ग्रामीण आज भी दो किमी0की खड़ी चढ़ाई व पीठ पर सामान उठाकर जंगली रास्ते से जान को जोखिम में डालकर आने-जाने को मजबूर है, बच्चो की प्राथमिक शिक्षा के लिए प्राथमिक विद्यालय खोला गया था, जो कि छात्र संख्या कम होने से बंद हो गया है। आठ साल के अंतराल में ग्रामीणों ने जमीन पर चाय बागान लगाया  है, और आगे वाइब्रेंट विलेज बनाने की योजना है। जरूरत है सिर्फ यातायात के लिए सड़क की। 

       कैलब सड़क के लिए वन भूमि हस्तांतरण की कार्यवाई जैसे ही उनके पास पहुंचेगी, वे शीघ्र ऑनलाइन शासन को भेज देगे। 

केके सिंह सहायक अभियंता लोनिवि पोखरी:

फोटो: कैलब गांव की संलग्न।

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