*मोहनखाल-कानातोली-चोपता-तुंगनाध सड़क की मांग एक सार्थक पहल*

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*मोहनखाल-कानातोली-चोपता-तुंगनाध सड़क की मांग एक सार्थक पहल*

*चाहे जो मजबूरी हो, मांग हमारी पूरी हो*

पुष्कर पर्वत न्यूज/राजेन्द्रअसवाल:




पोखरी-नागनाथ: 

जनपद चमोली व रुद्रप्रयाग की सीमा मोहनखाल-कानातोली-चोपता-तुंगनाथ सड़क की मांग एक सार्थक पहल है। सड़क की  स्वीकृति को लेकर क्षेत्र की जनता क्रमिक धरने पर डटे  है,और दम भरा जा रहा है कि   चाहे जो मजबूरी हो,मांग हमारी पूरी हो। इसी क्रम में आज क्रमिक धरना ग्यारहवें दिन भी जारी है। धरने पर बैठने वाले  अमरीक थपलियाल, महेन्द्र सिंह बिष्ट, राकेश नेगी,विनय थपलियाल, अमर सिंह,  महादेव भट्ट, पुष्कर सिंह बिष्ट, जीतपाल सिंह  बिष्ट, मस्तान सिंह नेगी,प्रकाश नेगी  व देवी प्रसाद  थपलियाल बैठे रहे।आन्दोलनकारियों ने कहा कि अस्सी के दशक में अविभाजित उत्तर-प्रदेश सरकार ने मोहनखाल-कानातोली-चोपता के तीर्थाटन व पर्यटन के महत्व को समझते हुए मोहनखाल से कानातोली तक 12 किमी0सडक का निर्माण वन क्षेत्र होने के कारण वन विभाग के माध्यम से करवाया  गया था। आगे सड़क का निर्माण न होने से इस सड़क  पर वन तस्करो को रोकने के लिए वाहनो की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए मोहनखाल में  वन विभाग ने अपना फाटक लगा रखा है। 09नवम्बर 2000 को उत्तराखंड राज्य  की स्थापना हुई, और ढाई दशक बाद भी क्षेत्र की जनता की मांग करने पर हमारे इसी क्षेत्र के विधायक व मंत्री ढाई दशक तक सरकार में जनप्रतिनिधि रहते हुए भी इसबात को लेकर एसेम्बली में प्रश्न उठाने तक की जहमत नही की गयी। जबकि   स्थानीय हो या बाहर से आने वाले तीर्थ यात्री हो या  पर्यटक जब रुद्रप्रयाग से क्रौच पर्वत कार्तिक स्वामी के दर्शन करने के बाद तथा भगवान रुद्रनाथ  से गोपीनाथ  के दर्शनो के बाद रास्ते में पुराण प्रसिद्ध बामेश्वर भगवान के दर्शन, मसोली में बोलन्दा भूतनाथ, पोखरी में देवो के देव पुष्करेश्वर महादेव  सहित क्षेत्र  में  अनेक देवी-देवताओं  सहित दुग्धखंबा देवी-राजराजेश्वरी के दर्शन करते हुए मोहनखाल और  यहां से कानातोली होते हुए चोपता उसके बाद तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ जी के दर्शन के लिए आसानी से पहुंच सकते है। प्रकृति प्रेमी पर्यटक जब  ट्रैक पर  चलकर मोहनखाल से आगे बढते हुए इस नैसर्गिक सुन्दर वातारण, विभिन्न बुग्यालों,विभिन्न प्रजाति के वृक्षो के बीच से विभिन्न प्रकार के पक्षियों अनेक प्रकार की कल-कल ध्वनि से गुंजायमान वातावरण  में सफर का आनंद लेते हुए, और यहां के बुग्यालो व हिमालय के दर्शन को पर्यटक अपने कैमरो में कैद कर इन यादगार पल को अपने सगे संबंधियों व जाने वालो को इस अनुपम दृष्य का अवलोकन करवायेंगे  तो निसंदेह  पर्यटको की आवाजाही में बढोत्तरी होती, और रास्ते में स्थानीय लोगो के रहने खाने की व्यवस्था के चलते एक रोजगार  का रास्ता भी मिलता। इस सड़क  के बनने से यह पर्यटन के मानचित्र में जुड़ने से यहां अलकनंदा व मंदाकिनी के बीच का संपूर्ण  उपेक्षित क्षेत्र का महत्व बढ जायेगा। इसके लिए मोहनखाल-कानातोली-चोपता-सड़क मांग को लेकर किया जा रहा आनन्दोलन क्षेत्र  के लोगो की एक सार्थक पहल है। एक दिन यह मांग अवश्य ही रंग लाएगी।

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