पोखरी अस्पताल विशेषज्ञ डाक्टरो के अभाव में हांफ रहा है:

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 पोखरी  का अस्पताल  विशेषज्ञ डाक्टरो के अभाव में हांफ रहा है:


पुष्कर पर्वत न्यूज/राजेन्द्र असवाल:

पोखरी: उत्तराखंड सरकार,  प्रदेश की जनता को बेत्तर स्वास्थ्य लाभ देने की बात जरूर करती है, अस्पताल भी खोले गये है, पद भी स्वीकृत  है,  लेकिन अस्पताल की जमीनी  हकीकत कुछ  और ही वयां कर रही है। यहां विकास खंड मुख्यालय पोखरी की बात करें तो स्थिति विपरीत है, क्षेत्र की  जनता को अच्छा 

 स्वास्थ्य सेवा देने  के लिए सरकार ने पीएचसी को सीएचसी में  उच्चीकृत किया है। लेकिन विशेषज्ञ डाक्टरो के अभाव में उचित लाभ देने में अस्पताल  हांफ रहा है। इसबात को सीएचसी में तैनात डाक्टर भी स्वीकार करते है। और बताते है, एकबार सर्जन व फिजिशियन आये थे, शीघ्र अन्यत्र चले गये,उसके बाद कोई नही आया।

 दरअसल वर्ष 2006 में पीएचसी को सीएचसी में   उच्चीकृत तो किया गया है, परन्तु आधुनिक साज-सज्जा तथा विशेषज्ञ डाक्टरो के पद भी स्वीकृत है। फिजिशियन, सर्जन तथा डेंटल सर्जन  बीस साल गुजरने के बाद भी आज तक नही आए है।  वहीं एक्सरे मशीन तो लगी है, परन्तु उसके संचालन के लिए टैक्निशियन नहीं है, व्यवस्था उपचिकित्सालय कर्णप्रयाग/सिमली से की गयी है, जो कि एक सप्ताह में तीन   दिन ही  सीएचसी  पोखरी में आते है। अल्ट्रासाउंड मशीन पहले यहां से जोशीमठ अस्पताल भेजी गयी थी।जन विरोध के बाद वापस आ गयी है।परन्तु रेडियोलाजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड मशीन भी धूल फांक रही है। डेंटिल सर्जन व डाक्टर भी दो साल पहले स्थानांतरण के बाद नही है, केवल एक फार्मासिस्ट तैनात है।  फार्मासिस्ट के  पांच पदो के सापेक्ष एक चीफ फार्मासिस्ट को काम संभालना पड़ता  है। जबकि फार्मासिस्टो की भी नितांत आवश्यक है।

सीएचसी में डाक्टरों के 13पद स्वीकृत है,के सापेक्ष छ:पदो पर पुरुष  व एक पद पर महिला डाक्टर तैनात है। और ओपीडी प्रतिदिन 50-60 तक रहती है।

    फार्मासिस्ट 5पद स्वीकृत हैं, के सापेक्ष एक पद तैनात है। इंडियन पब्लिक हेल्थ(IPHS)  लागू होने से फार्मासिस्टो के पद कम हुए है।

     स्टाफ नर्स आठ पद स्वीकृत है, जिसमें सात पदो पर महिलाएं व एक पद पर पुरुष तैनात है।

   एएनएम 14पद स्वीकृत है,सभी पर एएनएम तैनात है।

    हेल्थ एटीएम लगा है,पर्ची काउंटर में है। जिसका संचालन कोई भी स्वास्थ्य कर्मी कर सकते है। लेकिन अनुपयुक्त पड़ी है। इसके बारे में लोगो को जानकारी भी नही है।

     डाक्टरो के आवास की कमी है, डाक्टरो के अनुकूल क्वार्टर नही है, दो डाक्टर  किराये पर बाहर रहते है।आवास निर्माण के लिए विभागीय कार्यवाही गतिमान है।

        अल्ट्रासाउंड संचालन के लिए रेडियोलाॅजिस्ट  न होने से  लोगो को कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर व देहरादून जाना पड़ता है, प्रेगनेंट महिलाओ को अल्ट्रासाउंड के लिए उपचिकित्सालय कर्णप्रयाग व जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में पूरा दिन व्यतीत करना होता है।

    एक्स-रे करने के लिए टैक्निशिएन कर्णप्रयाग-सिमली से सप्ताह में तीन दिन आते है। पैथोलॉजी है, जिसमे संविदा कर्मी तैनात है। दवाइयां पर्याप्त है। विशेषज्ञ डाक्टर न होने से गंभीर रोगियों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। डा,प्रियम प्रभारी चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पोखरी।

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