*नागनाथ में लगने वाला गढवाल का ऐतिहासिक जन्माष्टमी मेला धूम-धाम मनाया गया*
पुष्कर पर्वत न्यूज/राजेन्द्रअसवाल:
पोखरी -नागनाथ:
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया गया,सुबह से ही श्रद्घालुओ ने घरो से लेकर मंदिरो में पूजा अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद लिया। घरो में भगवान कृष्ण के बाल्य रूप लड्डू गोपाल की पंचामृत से स्नान कर पूजा की गयी। इसके बाद पुष्करेश्वर महादेव पोखरी व काबेरेश्वर महादेव और नागनाथ स्वामी में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर देवस्थान गांव से मां धारीदेवी की ढोली श्रद्घालुओ के साथ नागनाथ मंदिर के दर्शन करने पहुंची इस मौके पर मेले में आए श्रद्घालु भक्तो को भगवान नागनाथ स्वामी के दर्शन के साथ-साथ मां धारी देवी के दर्शन का भी सौभाग्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
तत्पश्चात श्रद्घालु नागनाथ के समीप पोखरी बाजार में लगने वाले मेले में सिरकत की। कभी कड़ाके की धूप व कभी बारिश की बूंदा-बांदी के चलते मेले में बाहर से आए दुकानदारो की दुकानो से मेलार्थियों ने जमकर खरीदारी की। बताते चले कि गढ़वाल का एतिहासिक जन्माष्टमी का मेला जनपद चमोली के नागनाथ में लगता है। नागनाथ स्वामी के प्रति लोगो की अपार श्रद्धा व भक्ति रहती है, पहले यातायात का साधन न होने से श्रद्घालु-भक्तो का एक दिन पूर्व नागनाथ में आना शुरू हो जाता था।यहां पर रहने के लिए 1901 का मिडिल स्कूल था, जो आज इंटर तक उच्चीकृत हो गया है, इसमें रहते थे, और घर से लाई गयी रोटी खाकर रात गुजारते थे। दूसरे दिन सुबह उठकर स्नानादि कर भगवान नागनाथ स्वामी के दर्शन और आशीर्वाद लेकर जाते थे।यहां 1912 के करीबन नागनाथ में एक पतरोल(फॉरेस्ट गार्ड) की चौकी खोली गयी थी, उसके बाद फॉरेस्ट की चौकी खोली गयी,उसके बाद ब्रिटिश शासनकाल में जब अंग्रेजो का गढवाल दौरा हुआ तो, उनको गढवाल की ये वादियां भायी तो यहां पर रहने के लिए देवदार की लकड़ियों का एक शानदार बंगला बनाया जो कि कठ बंगले के नाम से प्रचलित था। इस धरोहर को देखने के लिए भी लोग दूर-दूर से आते थे। अंग्रेजो ने अपने भ्रमण के लिए इस क्षेत्र ठीक आठ किमी0 की दूरी पर मोहनखाल में और ठीक आठ किमी0 दूरी पर सिरोपाणी(त्रिशूला)में बंगला बनाया था, मोहनखाल व सिरोपाणी में आज भी बंगले है, लेकिन नागनाथ का आलीशान बंगला का मिटाया मेंट हो गया। अब नागनाथ में पूरा रेंज कार्यालय है।आज यातायात का साधन होने और मेलो का बाजारीकरण के दौर में श्रद्घालुओ का मंदिर में आना तो होता है, लेकिन दर्शन के बाद फौरन बाजार की ओर लौटने का सिल-सिला रहता है। पोखरी-बाजार में खाने- पीने व शाॅपिंग करने का मौका मिलता है। आज मेला नागनाथ से पोखरी -बाजार तक शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया है।


