रौता अस्पताल में लटके ताले,मरीजो के दवाई के लिए पड़े लाले
[पुष्कर पर्वत/राजेन्द्र असवाल]
जनपद चमोली के अंतर्गत विकास खण्ड पोखरी में लोपैथिक अस्पताल रौता में लटके ताले,मरीजो को पड़े दवाई के लाले। इस बात की पड़ताल रौता के ग्राम प्रधान बीरेंद्र राणा ने स्वयं की है। और अपनी ही सरकार पर सवालिया निशान उठाये, कहा कि लगातार शिकायतो के बाद अस्पताल में डॉक्टर ,फार्मासिस्ट व अन्य कोई भी कर्मचारी नही है।
विकास खंड मुख्यालय पोखरी से 24 किमी0 दूर दर्जन भर गांवो के बीच रौता में ऐलोपैथिक अस्पताल करीबन चालीस वर्ष पूर्व खोला गया है। स्वास्थ्य कर्मियो के अभाव में नाम मात्र का अस्पताल रह गया है। ग्राम प्रधान बीरेंद्र राणा ने गुरूवार को अस्पताल जाकर सच्चाई की पड़ताल की तो कर्मचारी तो दूर की बात है,अस्पताल के गेट पर ताला लगा मिला। यह है रौता अस्पताल की हालात का वीडीओ किया वायरल।प्रधान ने कहा कि वे अपने पांच वर्ष के कार्यकाल मे लगातार हर स्तर अस्पताल की समस्या बताते आ रहे,लेकिन किसी स्तर से रौता अस्पताल में डॉक्टरो की तैनाती की कोई समुचित व्यवस्था नही हो पायी है,कहा कि गत वर्ष अक्तूबर मे स्वास्थ्य मंत्री धनसिंह रावत पोखरी क्षेत्र में सात दिवसीय हिमवंत कविचन्द्र बर्त्वाल पर्यटन शरदोत्सव मेले में बतौर मुख्य अतिथि आए थे, उनसे पहली बात उनकी रौता अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर थी।और अस्पताल में नियमित रूप से डाक्टरो की तैनाती की याचना की गयी थी, स्वास्थ्य मंत्री रावत ने आश्वस्त किया था कि रौता अस्पताल में नियमित डाक्टरो की तैनाती कर दी जायेगी। लेकिन स्थिति जस की तस बनी है। जो कि क्षेत्र के दर्जनभर गाँवो के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।


