मोहनखाल-चोपता-तुंगनाथ सड़क की मांग जोर पकड़ने लगी,धरना 11वे दिन जारी:

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मोहनखाल-चोपता-तुंगनाथ सड़क की मांग जोर पकड़ने लगी,धरना 11वे दिन जारी:
पुष्कर पर्वत न्यूज/राजेन्द्रअसवाल:





पोखरी(चमोली) 
मोहनखाल-चोपता-तुंगनाथ सड़क की मांग को लेकर क्षेत्रीय जनता का क्रमिक धरना मंगलवार को 11वें दिन भी जारी रहा। धरने पर गोदी-गिंवला की महिलाएं अरुणा देवी,कुन्ती देवी,आशा देवी,रजनी,कविता व सुलोचना देवी बैठी रही। उन्होने कहा कि  सरकार ने जबतक उनकी सड़क को स्वीकृत नही किया तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा, कहा कि यदि सरकार ने  सड़क  स्वीकृति मे विलम्ब किया तो वे असहयोग आंदोलन शुरु कर देगें जिसकी संपूर्ण जिम्मेवारी उत्तराखण्ड सरकार की होगी।बताते चले कि मोहनखाल के आस-पास दर्जनो गाँव के ग्रामीण सरकार से लगातार मोहनखाल- चोपता-तुंगनाथ सड़क की मांग करते आ रहे है। यही नही 2024 मे ग्रीमीणो ने एक जबरदस्त आंदोलन मोहनखाल में चलाया , आंदोलन के उग्र रूप को देखते  हुए उत्तराखंड सरकार की बैचैनी बड़ने लगी तो सरकार ने  आंदोलन को  ठंडा करने का हथकंडा  अपनाते हुए प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट को आंदोलनकारियों के पास भेजा और उनकी सड़क की मांग मानने का आश्वासन देते हुए शासनादेश जारी करने की बात कही गई,  आंदोलनकारी जनता भी यही चाहती थी,अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट ने मुख्य मंत्री के रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनी में एक जन सभा में मोहनखाल-चोपता-तुंगनाथ सड़क की घोषणा कर डाली। इस घोषणा से क्षेत्र की आंदोलनकारी जनता में सड़क की आश जगी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया  कोई कार्रवाई सरकारकी ओर से आगे नही बड़ी तो,क्षेत्रीय जनता की सड़क की आश निराशा में बदलने लगी, फिर भी कई पत्राचार एवं सरकार से संपर्क करने पर भी जब कुछ हासिल नही हुआ तो जनता को लोकतान्त्रिक अधिकारो का सहारा लेकर पुनः मोहनखाल में आंदोलन  तब शुरू किया गया जब भारत देश के लोग 80वां आज़ादी का जश्न मना रहे थे,  उस दिन क्षेत्र के लोगो ने जश्न न मनाते हुए अपनी बरषो पुरानी  मोहनखाल चोपता-तुंगनाथ सड़क की मांग को लेकर क्रमिक धरने पर बैठ गये। जो कि धरना लगातार जारी है, यह क्रमिक धरने की अध्यक्षता राकेश नेगी कर रहे है, वहीं सबसे बड़ा सहयोग व्यापार मंडल मोहनखाल,  ब्राह्मण थाला,थालाबैड, सटियाना, किणजाणी,बाड़ब,रौता,गोदी-गिंवला, पोगठा,चन्द्रनगर,कांदी सहित दर्जनो गाँवो के जनप्रतिनिधि,ग्रामीण महिला व पुरुष करते आ रहे है, जिससे प्रतीत होता है कि अब सड़क का आंदोलन सफलतापूर्वक हासिल होने के बाद ही समाप्त होगा।

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