सेरा-मालकोटी के ग्रामीण यातायात के अभाव में पालकी से ले जाते है,बीमार।

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 सेरा-मालकोटी के ग्रामीण यातायात के अभाव में पालकी से ले जाते है,बीमार। 

पुष्कर पर्वत न्यूज/राजेन्द्रअसवाल:




सेरा-मालकोटी के ग्रामीण यातायात के अभाव में पालकी से ले जाते है,बीमार। 


पोखरी(चमोली)

 विकास खण्ड पोखरी  की सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत सेरा-मालकोटी आज भी यातायात व्यवस्था के  लिए तरस रही है। कई सरकारें आ गयी, कई चले गयी लेकिन इस ग्राम  पंचायत की यातायात व्यवस्था की किसी ने सुद्ध नहीं ली है। जिस वजह यहां के ग्रामीण पांच किमी0 की ऊबड़ -खाबड़ उतराई व चढ़ाई पैदल नापने को मजबूर है, तथा रोज़मर्रा की सामाग्री पीठ पर लाद कर लाने ले जाने में पसीना बहाते है। सबसे बड़ी दिक्कत तो बुजुर्गो व बीमार तथा गर्भवती महिलाओ की होती है। सड़क के अभाव  में बीमार को ग्रामीण डंडी के सहारे पांच  किमी0 उतार चढ़ाव  रास्ते पर चलकर सड़क तक पहुंचाते है।

    उल्लेखनीय है कि पोखरी विकास खण्ड की आखिरी ग्राम पंचायत सेरा-मालकोटी जो कि चमोली व रुद्रप्रयाग जिले की सीमा पर स्थित है,और एक घाटी में बसी हुई है। वर्ष 1998 में आये बिनासकारी भूकंप के दौरान मालकोटी गांव खतरे में आ गया था, तत्कालीन जिला व तहसील प्रशासन ने  उन्हे मूल गांव से सुरक्षित स्थान पर कुछ दूरी में विस्थापित किया, उन्हे मकान,  पानी,बिजली  की सुविधा भी उपलब्ध करायी थी। जो कि आज भी मूल रूप से  ग्रामीण वहीं रहते आ रहे है। लेकिन विडंबना यह है कि यह भूमि वन विभाग की है, और प्रशासन ने आजतक डिस्फाॅरेट नही करायी है, और ग्रामीण  को बार-बार वन विभाग  अपने विभाग  की भूमि बताकर वहां से हटाने की कार्रवाई करते रहता है। जिसको लेकर ग्रामीण तहसील प्रशासन के पास अपनी गुहार लगाते रहते है, परन्तु प्रशासन द्वारा  मात्र आश्वासन देकर उनको शांत कर दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है, शासन प्रशासन ने इतनी लंबी अवधि बतने के बाद भी  उनको ऑवटित भूमि  को हस्तांतरण करने की कोई कार्रवाई नही की है। बताया गया है। उडामांडा-रौता पीएमजीएसवाई सड़क  रौता से सेरा मालकोटी के लिए पांच किमी0 सड़क  स्वीकृति का प्रपोजल शासन में  फाइल में धूल फांक रहा है। जो आगे नही बड़ पा रहा है, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी ग्रामीणों को झूठे आश्वासन से छलते रहते है। जिससे ग्रामीण आज भी संकट में है।

सेरा-मालकोटी के ग्रामीण महावीरसिंह,प्रधान राजेश सिंह भंडारी ने कहा कि  सेरा-मालकोटी की पांच किमी0 सड़क का जो प्रपोजल स्वीकृति के लोनिवि पोखरी ने शासन को भेजा गया है, अग्रिम कार्रवाई न होने से मामला लंबित पड़ा है।

   सेरा-मालकोटी पांच किलोमीटर  सड़क के लिए वन विभाग से  वन भूमि हस्तांतरण की कार्यवाई की गई है, जो कि शीघ्र शासन को  गयी है। वन भूमि की स्वीकृति उपरांत अग्रिम कार्यवाई की जायेगी।  ज्योति सिंह रावत सहायक अभियंता लोनिवि निर्माण खंड पोखरी, जिला-चमोली।

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