78 वर्षीय रणजीत सिंह, देवदार के पौधो को लगाने की मुहिम चला रहे है:
पुष्कर पर्वत न्यूज/राजेन्द्रअसवाल:
पोखरी(चमोली)
आधुनिक युग में जंगलो के अत्यधिक दोहन के कारण पर्यावरण असंतुलन,जलवायु परिवर्तन व जैव विविधता का क्षरण से मानव जीवन खतरे में है, पर्यावरण संरक्षण और जंगली जानवरो का जंगलो से आवादी में आने पर रोक लगाने के लिए योजना बनाने का लक्ष्य लेकर 78 वर्षीय रणजीत सिंह पोगठा- सरणा ने जीवन के अंतिम पड़ाव में एक मुहिम को अंजाम दिया जा रहा है। उनका पेड़-पौधों से पिछले लंबे समय से संबंध रहा है। रणजीत सिंह ने 1959 में गांव के ही विद्यालय से पांचवीं की पढ़ाई की है।उसके बाद वे घरेलू कृषि कार्य पर लग गये।उन्होने 1987 में करीबन आठ नाली भूमि सरणा(कनकचौरी) में नर्सरी लगाई जिसमें देवदार, सुरई, फांगर, अंगू,अखरोट,माल्टा आदि के बीज बो कर पौध तैयार कर वन विभाग तथा उद्यान विभाग को बेचे जाते हैं, यही उनकी आमदानी का जरिया रहा, इसी में से नर्सरी के काम पर लगाये गये मजदूरों को मजदूरी दी जाती थी।
उनका लगातार पौधो और जंगलो से ही लगाव रहा है। इस लिए वे समय -समय पर जंगलो में खाली पड़ी जमीन में पौध लगाकर धरती को हरा-भरा करने का प्रयास करते रहते रहे है। उन्होने कहा कि इस कार्य से उनको काफी प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि पोखरी-रुद्रप्रयाग के बेस कैंप कनकचौंरी से कार्तिक स्वामी मंदिर के पैदल रास्ते पर ढौढिक जहां पर यात्रियों के लिए धर्मशालाएं बनी है, इस बीच केवल देवदार के दो पेड़ मिले है, उन्होने संकल्प लिया कि इस क्षेत्र में और भी देवदार के पेड़ उगाने चाहिए।उन्होने अपने पोते के साथ 15 किलो देवदार का बीज तैयार कर ढाई माह पूर्व कार्तिक स्वामी के जंगल मे जगह -जगह पर बीज बो दिये, जो और जो बीज बचे उन्हे वह सिद्धपीठ कालीमठ के पास सलाइडिंग जोन में बो कर आ गये। इधर कार्तिक स्वामी क्षेत्र में ढाई माह में देवदार के हजारो पौध तैयार हो गये है,उन्हें खाली जमीन पर लगाया जा रहा है। वयोवृद्ध रणजीत सिंह को पूछे जाने पर कि यह प्रेरणा कैसे जगी तो उन्होने कहा कि उन्हें कुछ धार्मिक पुस्तको को पड़ने की आदत है, कहा कि मत्स्य पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति एक पेड़ लगाता और उसका संरक्षण करता है, उसके 21पीडियों के पृत्र स्वर्ग हो जाते है ,
इसी प्रेरणा को लेकर वे हाथ में कुदाल लेकर चल पड़े जंगलो में पेड़ लगाने। रणजीत सिंह ने समाज के युवाओ को संदेश देते हुए कहा कि जंगल खाली हो रहे है, और जंगलो से जंगली जानवर गांवो की ओर आ गये है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए प्राकृतिक संसाधनो को बचाने के लिए जंगलो में पेड़ अवश्य लगाये, साथ ही जंगलो में जंगली फलदार पेड़ म्योलू,फांगर,अखरोट व भमोरा को लगाये ताकि उन पर लगने वाले फल जंगली जानवरो का आहार हो जायेगा तो उनका गांवो की ओर रुख कम हो जायेगा। पोगठा ग्राम पंचायत के प्रशासक रमेश सिंह नेगी, कार्तिक स्वामी मंदिर समित के सचिव बलराम सिंह नेगी,जीतसिंह नेगी के इस नेक कार्य की प्रशंसा की है।
आम जन को क्या संदेश देते है वनक्षेत्राधिकारी नागनाथ।
पोगठा -सरणा के रणजीत सिंह जिस प्रकार पर्यावरण के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से काम कर रहे है,यह सराहनीय है, इनके इस प्रकार के पुण्य कार्यो की तरह हर नागरिक को प्रेरणा पेड़ लगाने व उसकी सुरक्षा का काम करना चाहिए, जंगलो को आग से बचाना है, जंगलो का दोहन रोकना है, पर्यावरण बचाना है।जंगलो में कंद-मूल के पेड़ो को लगाकर जंगली जानवरो को आवादी के क्षेत्र में आने से रोकने का प्रयास करना है, साथ ही जंगलो में जानवरो के लिए पानी के स्रोतो से छेड़-खानी नही करनी है। नवल किशोर नेगी, वन क्षेत्राधिकारी वन क्षेत्र नागनाथ।



